Friday, June 5, 2020

शुभ अशुभ।

कुरीति

हमारे समाज में ये परम्परा सी बनी हुई हैं कि जब भी कोई  काम शुरु करते हैं शुभ मुहूर्त निकलवाते है ब्रह्माणों से...

 जैसे किसी की बेटी की शादी होगी तो पहले शुभ मुहूर्त निकलवायेगे शुभ लग्न में शादी करेंगे
अगर हम उदाहरण ले राजा जनक का तो उन्होंने भी सीता जी का ब्याह राजा दशरथ के पुत्र श्री राम जी से किया जो संस्कार था !
ब्रह्माण के पास, पंडित जी के पास गये, शादी किस लग्न में, किस नक्षत्र में ठीक रहेगा... तो ये ब्रह्माण लोग ये बताते है ये ज्योतिष.. कि फलानी तारिक को शुभ मुहूर्त है फलानी को शुभ नहीं है शादी नहीं करनी चाहिए
 सब इन ब्रह्माणों से शुभ लग्न निकलवाकर शादी करते हैं फिर भी बेटी विधवा क्यों हो जाती है?? फिर भी कोई सुख नहीं..

  परमात्मा कहते हैं कि कर्म रेख टारी नहीं टरै आप जो साधना करते हो उससे आपके जो लेख है वो नहीं टल सकते...
वो टलेगे पूर्ण परमात्मा की भक्ति से, कबीर परमात्मा की साधना से...हमारे माड़े लेख भी टलेगे

  सीता जी के ब्याह के बारे में बताते हैं कि वशीष्ट मुनी जी राजा दशरथ के गुरु थे।
और श्री राम जी लक्ष्मण जी के गुरु थे...
तो वशीष्ट मुनी जी ने 3 दिन तक ब्याह रोक दिया सीता जी का..
जब की राम जी ने धनुष भी तोड़ दिया.. उनका मानना था कि अभी शुभ घड़ी नहीं है, तीसरे चौथे दिन जाकर शुभ लग्न शुभ नक्षत्र हो जाये और फिर सीता जी सदा सुखी रहेगी...
  फिर शादी हुआ, शादी होते ही बनवास हुआ, बनवास में अपहरण हुआ वहां युद्ध  हुआ पता नहीं कितना आदमी मर गये, फिर सीता जी को लाये और फिर आते ही घर से निकाल दिया... अब बताओ कौनसा सुख हुआ..

  वशीष्ट मुनी जी जैसे ब्रह्माण आज तो हो ही नहीं सकते...कबीर परमात्मा कहते हैं कि...
"वशीष्ट मुनी से तत् वित त्रिकाली योगी"
जिसको आप तीनों कालों को जानने वाले मानते हो,मानते थे
वशीष्ट मुनी से तत् विता (तिरकाली) योगी और सूज के लग्न धरै!
और सीता हरण, मरण दशरथ का
वो वन में राम फिरै!!

कैसा राज दिया लग्न के सौधन ने, पिता मर गये, बनवास हो गया, कहाँ राम जी कहाँ सीता जी??
क्या सहारा दिया उस लग्न ने??

इस लिए कहते हैं कि परमात्मा का नाम लेकर भक्ति करें हर दिन ही शुभ मुहूर्त है

पूर्ण परमात्मा के नाम से  हमारे दसों दिशाओं का दिशा सूल समाप्त हो जायेगा

समरथ की शरणा गहै रंग होरी हो!
कदै ना हो अकाज राम रंग होरी हो!!


साधना टीवी पर देखें सत्संग हर शाम 7:30 बजे 
 5 जून को सुबह 9-12 बजे तक साधना चैनल पर कबीर 623 वाँ प्रकट दिवस के अवसर पर जरुर देखें !

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